वेदों के श्रेष्ठ ग्रंथों में शामिल विष्णुसहस्रनाम भगवान विष्णु के सहस्त्र नामों का स्तोत्र है। इसका नामस्मरण करने से मन, शरीर और आत्मा को शांति मिलती है, साथ ही अनेक दोष, अड़चनें और संकट दूर होते हैं, ऐसा माना जाता है।
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की जन्म राशि, नक्षत्र और उनके चरणों के अनुसार कुछ विशिष्ट नाम या श्लोक अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। इस लेख में हम मेष राशि के अश्विनी, भरणी व कृत्तिका नक्षत्र के चरणानुसार विष्णुसहस्रनाम के श्लोक दे रहे हैं:
अश्विनी नक्षत्रप्रथम चरण:
ॐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः
भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः ॥१॥
द्वितीय चरण:
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः
अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥२॥
तृतीय चरण:
योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः
नारसिंहवपुः श्रीमान्केशवः पुरुषोत्तमः ॥३॥
चतुर्थ चरण:
सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः
सम्भवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः ॥४॥
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प्रथम चरण:
स्वयम्भूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः
अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरत्तमः ॥५॥
द्वितीय चरण:
अप्रमेयो ह्रषीकेशः पद्मनाभोऽमरप्रभुः
विश्वकर्मा मनुस्त्वष्टा स्थविष्ठः स्थविरो ध्रुवः ॥६॥
तृतीय चरण:
अग्राह्यः शाश्वतः कृष्णो लोहिताक्षः प्रतर्दनः
प्रभूतिस्त्रिककुब्धाम पवित्रं मङ्गलं परम् ॥७॥
चतुर्थ चरण:
ईशानः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः
हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः ॥८॥
कृत्तिका नक्षत्र (प्रथम चरण - मेष राशि):
ईश्वरो विक्रमी धन्वी मेधावी विक्रमः क्रमः
अनुत्तमो दुराधर्षः कृतज्ञः कृतिरात्मवान् ॥९॥
ऊपर दिए गए श्लोक मेष राशि के अश्विनी, भरणी और कृत्तिका नक्षत्रों के चारों चरणों के लिए विष्णुसहस्रनाम से चयनित विशिष्ट मंत्र हैं। ये श्लोक दैनिक जप, ध्यान या संकट के समय मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।
यदि आपका चंद्र राशी मेष है और नक्षत्र अश्विनी, भरणी या कृत्तिका में से कोई भी है, तो ऊपर दिए गए श्लोक को अपने चरण के अनुसार पढ़ें और जप करें। प्रतिदिन 11, 21 बार जाप करें।

