मिथुन राशि विष्णु सहस्रनाम उपाय | नक्षत्र चरण वार मंत्र

Vishnu Sahasranama – Gemini Rashi Nakshatra Charan Upay

वेदों के श्रेष्ठ ग्रंथों में शामिल विष्णुसहस्रनाम भगवान विष्णु के हजार नामों का एक पवित्र स्तोत्र है। इस नामस्मरण को करने से मन, शरीर और आत्मा को शांति मिलती है, तथा अनेक दोष, बाधाएँ और संकट दूर होते हैं, ऐसा माना जाता है।

विष्णुसहस्रनाम भगवान विष्णु के हजार पवित्र नामों से युक्त स्तोत्र है। इसमें प्रत्येक नाम में दिव्य ऊर्जा और कल्याणकारी शक्ति निहित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति के जन्म के समय की राशि, नक्षत्र और उसके चरण के आधार पर कुछ विशेष नाम या श्लोक अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं।

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प्रत्येक चरण के लिए विष्णुसहस्रनाम से एक श्लोक चुना गया है, जिसका नियमित जप या स्मरण करने से मानसिक संतोष, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक स्थिरता प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार इससे चरण और नक्षत्र दोष भी दूर होते हैं। ये श्लोक नियमित पाठ, जप और ध्यान के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

इस लेख में हमने मिथुन राशि के अंतर्गत आने वाले नक्षत्रों और उनके प्रत्येक चरण के अनुसार उपयुक्त श्लोक दिए हैं:

यदि आपकी चंद्र राशि मिथुन है, और आपका नक्षत्र मृगशिरा, आर्द्रा या पुनर्वसु में से कोई है, तो नीचे दिए गए श्लोक अपने चरण के अनुसार पढ़ें और जप करें।

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राशि : मिथुन, नक्षत्र : मृगशिरा, चरण : तृतीय

महाबुद्धिर्महावीर्यो महाशक्तिर्महाद्युतिः ।
अनिर्देश्यवपुः श्रीमानमेयात्मा महाद्रिधृक् ॥१९॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : मृगशिरा, चरण : चतुर्थ

महेष्वासो महीभर्ता श्रीनिवासः सतां गतिः ।
अनिरुद्धः सुरानन्दो गोविन्दो गोविदाम पतिः ॥२०॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : आर्द्रा, चरण : प्रथम

मरीचिर्दमनो हंसः सुपर्णो भुजगोत्तमः ।
हिरण्यनाभः सुतपाः पद्मनाभः प्रजापतिः ॥२१॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : आर्द्रा, चरण : द्वितीय

अमृत्युः सर्वदृक्‍ सिंहः सन्धाता सन्धिमान्सिथरः ।
अजो दुर्मर्षणः शास्ता विश्रुतात्मा सुरारिहा ॥२२॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : आर्द्रा, चरण : तृतीय

गुरुर्गुरुतमो धाम सत्यः सत्यपराक्रमः ।
निमिषोऽनिमिषः स्त्रग्वी वाचस्पतिरुदारधीः ॥२३॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : आर्द्रा, चरण : चतुर्थ

अग्रणीर्ग्रामणीः श्रीमान्न्यायो नेता समीरणः ।
सहस्त्रमूर्धा विश्वात्मा सहस्त्राक्षः सहस्त्रपात् ॥२४॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : पुनर्वसु, चरण : प्रथम

आवर्तनो निवृत्तात्मा संवृतः सम्प्रमर्दनः ।
अहः संवर्तको वह्निरनिलो धरणीधरः ॥२५॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : पुनर्वसु, चरण : द्वितीय

सुप्रसादः प्रसनात्मा विश्वधृग्विश्वभुग्विभुः ।
सत्कर्ता सत्कृतः साधर्जह्नुर्नारायणो नरः ॥२६॥

राशि : मिथुन, नक्षत्र : पुनर्वसु, चरण : तृतीय

असंख्येयोऽप्रमेयात्मा विशिष्टः शिष्टकृच्छचिः ।
सिद्धार्थः सिद्धसंकल्पः सिद्धिदः सिद्धिसाधनः ॥२७॥

उपरोक्त श्लोक मिथुन राशि के मृगशिरा, आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्रों के चरणों के अनुसार चुने गए विष्णुसहस्रनाम के विशेष मंत्र हैं। ये श्लोक दैनिक जप, ध्यान और विशेष रूप से कठिन समय में मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।

अपने नक्षत्र और चरण के अनुसार उचित श्लोक का जप करने से आत्मिक स्थिरता, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

आप इस लेख को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं ताकि वे भी इस नामस्मरण का लाभ प्राप्त कर सकें।

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