कर्क राशि के लिए विष्णु सहस्रनाम | नक्षत्र चरण अनुसार मंत्र

 

विष्णु सहस्रनाम - कर्क राशि नक्षत्र चरण उपाय
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वेदों में सबसे पवित्र और असरदार ग्रंथों में से एक विष्णु सहस्रनाम है। भगवान विष्णु के हज़ार नामों वाला यह भजन मन, शरीर और आत्मा को शांति देने वाला माना जाता है।

ज्योतिष के अनुसार, हर व्यक्ति के जन्म के समय उसके रास, नक्षत्र और चरण के हिसाब से कुछ श्लोक बहुत असरदार होते हैं। इन श्लोकों का रेगुलर जाप करने से नक्षत्र दोष, चरण दोष कम होता है, और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी और स्थिरता भी आती है।

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नीचे दिए गए श्लोक कर्क राशि में पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्रों के अलग-अलग चरणों के हिसाब से चुने गए हैं और खास तौर पर उपयोगी माने जाते हैं।

🔱 श्लोक (Rashi – Nakshatra – Charan Wise)

रास कर्क, नक्षत्र : पुनर्वसु, चरण : चतुर्थ

वृषाही वृषभो विष्णुर्वृषपर्वा वृषोदरः ।
वर्धनो वर्धमानश्च विविक्तः श्रुतिसागरः ॥२८॥

रास कर्क, नक्षत्र : पुष्य, चरण : प्रथम

सुभुजो दुर्धरो वाग्मी महेन्द्रो वसुदो वसुः ।
नैकरूपो बृहद्रूपः शिपिविष्टः प्रकाशनः ॥२९॥

रास कर्क, नक्षत्र : पुष्य, चरण : द्वितीय

ओजस्तेजोद्युतिधरः प्रकाशात्मा प्रतापनः ।
ऋद्धः स्पष्टाक्षरो मन्त्रश्चन्द्रांशुर्भास्करद्युतिः ॥३०॥

रास कर्क, नक्षत्र : पुष्य, चरण : तृतीय

अमृतांशूद्भवो भानुः शशबिन्दुः सुरेश्वरः ।
औषधं जगतः सेतुः सत्यधर्मपराक्रमः ॥३१॥

रास कर्क, नक्षत्र : पुष्य, चरण : चतुर्थ

भूतभव्यभवन्नाथः पवनः पावनोऽनलः ।
कामहा कामकृत्कान्तः कामः कामप्रदः प्रभुः ॥३२॥

रास कर्क, नक्षत्र : आश्लेषा, चरण : प्रथम

युगादिकृद्युगावर्तो नैकमायो महाशनः ।
अदृश्योऽव्यक्तरूपश्च सहस्त्रजिदनन्तजित् ॥३३॥

रास कर्क, नक्षत्र : आश्लेषा, चरण : द्वितीय

इष्टोऽविशिष्टः शिष्टेष्टः शिखण्डी नहुषो वृषः ।
क्रोधहा क्रोधकृत्कर्ता विश्वबाहुर्महीधरः ॥३४॥

रास कर्क, नक्षत्र : आश्लेषा, चरण : तृतीय

अच्युतः प्रथितः प्राणः प्राणदो वासवानुजः ।
अपां निधिरधिष्ठानमप्रमत्तः प्रतिष्ठितः ॥३५॥

रास कर्क, नक्षत्र : आश्लेषा, चरण : चतुर्थ

स्कन्दः स्कन्दधरो धुर्यो वरदो वायुवाहनः ।
वासुदेवो बृहद्भानुरादिदेवः पुरन्दरः ॥३६॥
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🌿 निष्कर्ष (Conclusion)

ऊपर दिए गए सभी श्लोक विष्णु सहस्रनाम के बहुत असरदार मंत्र हैं, जिन्हें कर्क राशि में पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्रों के अलग-अलग चरणों के हिसाब से चुना गया है।

इन श्लोकों का रेगुलर जाप करने से चरण दोष और नक्षत्र दोष कम करने में मदद मिलती है, और मानसिक शांति, पॉजिटिव एनर्जी और आध्यात्मिक तरक्की भी मिलती है।

अपने नक्षत्र और चरण के हिसाब से सही श्लोक चुनकर और रोज़ उसका जाप करने से आपको भगवान विष्णु की कृपा मिलेगी और जीवन में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद मिलेगी।

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