वृश्चिक राशि के लिए विष्णु सहस्रनाम मंत्र | नक्षत्र और चरण अनुसार मंत्र 64 से 72

 

Vishnu sahstranaam
Image From -Google 

वृश्चिक राशि के लिए विष्णु सहस्रनाम मंत्र

GuruCharitra Books ×
Book 1

GuruCharitra Part 1 Chapter 1 to 5

English Reading Edition

Buy
Book 2

GuruCharitra Part 2 Chapter 6 to 10

Spiritual Wisdom

Buy
Book 3

GuruCharitra Part 3 Chapter 11 to 15

Datta Teachings

Buy
Book 4

GuruCharitra Part 4 Chapter 16 to 20

Daily Devotional

Buy
Book 5

GuruCharitra Part 5 Chapter 21 to 25

Divine Reading

Buy
Book 6

GuruCharitra Part 6 Chapter 26 to 30

English Transliteration

Buy
Book 7

GuruCharitra Part 7 Chapter 31 to 35

Sacred Knowledge

Buy
Book 8

GuruCharitra Part 8 Chapter 36 to 40

Datta Blessings

Buy
Book 9

GuruCharitra Part 9 Chapter 41 to 45

Spiritual Journey

Buy
Book 10

GuruCharitra Part 10 Chapter 46 to 53

Complete Edition

Buy
वृश्चिक राशि वालों के लिए यहां दिए गए विष्णु सहस्रनाम के मंत्र विशेष शुभ माने जाते हैं। अपनी राशि, नक्षत्र और चरण के अनुसार इन मंत्रों का श्रद्धा से जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इन मंत्रों से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित जाप करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
🪔 टीप : ये श्लोक उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभदायक माने जाते हैं जिनकी चंद्र राशि वृश्चिक है।


YouTube video link for Mantra👇

  https://youtu.be/0wMK8ib5YjE?si=rJ-IIqwm_mS9AgjM

रास : वृश्चिक, नक्षत्र : विशाखा, चरण : चतुर्थ

अनिवर्ती निवृत्तात्मा संक्षेप्ता क्षेमकृच्छिवः ।
श्रीवत्सवक्षाः श्रीनिवासः श्रीपतिः श्रीमतां वरः ॥६४॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : अनुराधा, चरण : प्रथम

श्रीदः श्रीशः श्रीनिवासः श्रीनिधिः श्रीविभावनः ।
श्रीधरः श्रीकरः श्रेयः श्रीमाँल्लोकत्रयाश्रयः ॥६५॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : अनुराधा, चरण : द्वितीय

स्वक्षः स्वङ्ग शतानन्दो नन्दिर्ज्योतिर्गणेश्वर्ह ।
विजितात्मा विधेयात्मा सत्कीर्तिश्छिन्नसंशयः ॥६६॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : अनुराधा, चरण : तृतीय

उदीर्णः सर्वतश्चक्षुरनीशः शाश्वतस्थिरः ।
भूशयो भूषणो भूतिर्विशोकः शोकनाशनः ॥६७॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : अनुराधा, चरण : चतुर्थ

अर्चिष्मानर्चितः कुम्भो विशुद्धात्मा विशोधनः ।
अनिरुद्धोऽप्रतिरथः प्रद्युम्नोऽमितविक्रमः ॥६८॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : ज्येष्ठा, चरण : प्रथम

कालनेमिनिहा वीरः शौरिः शूरजनेश्वरः ।
त्रिलोकात्मा त्रिलोकशः केशवः केशिहा हरिः ॥६९॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : ज्येष्ठा, चरण : द्वितीय

कामदेवः कामपालः कामी कान्तः कृतागमः ।
अनिर्देश्यवपुर्विष्णुर्वीरोऽनन्तो धनंजयः ॥७०॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : ज्येष्ठा, चरण : तृतीय

ब्रह्मण्यो ब्रह्मकृद्‍ब्रह्मा ब्रह्म ब्रह्मविवर्धनः ।
ब्रह्मविद्‍ब्राह्मणो ब्रह्मी ब्रह्मज्ञो ब्राह्मणप्रियः ॥७१॥


रास : वृश्चिक, नक्षत्र : ज्येष्ठा, चरण : चतुर्थ

महाक्रमो महाकर्मा महातेजा महोरगः ।
महाक्रतुर्महायज्वा महायज्ञो महाहविः ॥७२॥


निष्कर्ष :
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए ये विष्णु सहस्रनाम मंत्र अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माने जाते हैं। रोज श्रद्धा और विश्वास के साथ इनका जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख, शांति व सफलता प्राप्त होती है।

Thank You For Valuable Comment

Previous Post Next Post

Contact Form