✨ परिचय
मकर राशि को ज्योतिष शास्त्र में अनुशासन, धैर्य, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के जातक सामान्यतः जिम्मेदार, कर्मठ और लक्ष्य प्राप्ति के लिए समर्पित होते हैं।
वेद और ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक राशि, नक्षत्र और उसके चरणों से विशिष्ट मंत्र एवं श्लोक जुड़े हुए हैं। विष्णुसहस्रनाम का नियमित पाठ मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
इस लेख में मकर राशि के उत्तराषाढ़ा, श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्रों के संबंधित चरणों के अनुसार विष्णुसहस्रनाम के श्लोक दिए गए हैं।
ये सभी विष्णुसहस्रनाम श्लोक उन व्यक्तियों के लिए हैं जिनकी मकर चंद्र राशि (Moon Sign) है। जन्मकुंडली में चंद्र राशि के अनुसार इन मंत्रों का जप करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
🟠 मकर राशि – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
🔸 चरण 2
चतुरात्मा चतुर्भावश्चतुर्वेदविदेकपात् ॥८२॥
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🔸 चरण 3
दुर्लभो दुर्गमो दुर्गो दुरावासो दुरारिहा ॥८३॥
🔸 चरण 4
इन्द्रकर्मा महाकर्मा कृतकर्मा कृतागमः ॥८४॥
🟠 मकर राशि – श्रवण नक्षत्र
🔸 चरण 1
अर्को वाजसनः श्रृङ्गी जयन्तः सर्वविज्जयी ॥८५॥
🔸 चरण 2
महाह्रदो महागर्तो महाभूतो महानिधिः ॥८६॥
🔸 चरण 3
अमृताशोऽमृतवपुः सर्वज्ञः सर्वतोमुखः ॥८७॥
🔸 चरण 4
न्यग्रोधोदुम्बरोऽश्वत्थश्चाणूरान्ध्रनिषूदनः ॥८८॥
🟠 मकर राशि – धनिष्ठा नक्षत्र
🔸 चरण 1
अमूर्तिरनघोऽचिन्त्यो भयकृद्भयनाशनः ॥८९॥
🔸 चरण 2
अधृतः स्वधृतः स्वास्यः प्राग्वंशो वंशवर्धनः ॥९०॥
🔵 निष्कर्ष
विष्णुसहस्रनाम के ये श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक विकास प्रदान करने वाले शक्तिशाली मंत्र हैं।
मकर राशि के जातक यदि अपने नक्षत्र और चरण के अनुसार इन श्लोकों का नियमित जप करें, तो जीवन में सफलता, स्थिरता और सुख प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक जप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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