मीन राशि के लिए विष्णुसहस्रनाम श्लोक | पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र अनुसार

मीन राशि के लिए विष्णुसहस्रनाम श्लोक | नक्षत्र एवं चरण अनुसार

🐟 मीन राशि के लिए विष्णुसहस्रनाम श्लोक

(नक्षत्र एवं चरण अनुसार)

✨ परिचय

मीन (Pisces) राशि को आध्यात्मिकता, करुणा, संवेदनशीलता और अंतर्ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के जातकों में दयालुता, कल्पनाशक्ति और ईश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा देखने को मिलती है।

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वेद और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक राशि, नक्षत्र और उसके चरण से विशिष्ट मंत्र एवं श्लोक जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से विष्णुसहस्रनाम अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र माना जाता है, जो मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।


इस लेख में मीन राशि के पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के प्रत्येक चरण अनुसार संबंधित विष्णुसहस्रनाम श्लोक दिए गए हैं।

🟡 विशेष सूचना

ये सभी विष्णुसहस्रनाम श्लोक उन व्यक्तियों के लिए हैं जिनकी मीन चंद्र राशि (Moon Sign Pisces) है। जन्मकुंडली में चंद्र राशि के अनुसार इन मंत्रों का जप करना अधिक लाभकारी माना जाता है।

🟠 मीन राशि – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र

🔸 चरण ४

अनन्तरूपोऽनन्तश्रीर्जितमन्युर्भयापहः ।
चतुरस्त्रो गभीरात्मा विदिशो व्यादिशो दिशः ॥१००॥

🟠 मीन राशि – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र

🔸 चरण १

अनादिर्भूर्भुवो लक्ष्मीः सुवीरो रुचिराङ्गदः ।
जननो जनजन्मादिर्भीमो भीमपराक्रमः ॥१०१॥
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🔸 चरण २

आधारनिलयोऽधाता पुष्पहासः प्रजागरः ।
ऊर्ध्वगः सत्पथाचारः प्राणदः प्रणवः पणः ॥१०२॥

🔸 चरण ३

प्रमाणं प्राणनिलयः प्राणभृत्प्राणजीवनः ।
तत्त्वं तत्त्वविदेकात्मा जन्ममृत्युजरातिगः ॥१०३॥

🔸 चरण ४

भूर्भुवः स्वस्तरुस्तारः सविता प्रपितामहः ।
यज्ञो यज्ञपतिर्यज्वा यज्ञाङ्गो यज्ञवाहनः ॥१०४॥

🟠 मीन राशि – रेवती नक्षत्र

🔸 चरण १

यज्ञभृद्यज्ञकृद्यज्ञी यज्ञभुग्यज्ञसाधनः ।
यज्ञान्तकृद्यज्ञगुह्यमन्नमन्नाद एव च ॥१०५॥

🔸 चरण २

आत्मयोनिः स्वयंजातो वैखानः सामगायनः ।
देवकीनन्दनः स्त्रष्टा क्षितीशः पापनाशनः ॥१०६॥

🔸 चरण ३

शङ्खभृन्नन्दकी चक्री शार्ङ्गधन्वा गदाधरः ।
रथाङ्गपाणिरक्षोभ्यः सर्वप्रहरणायुधः ॥१०७॥

🔸 चरण ४

॥ सर्वप्रहरणायुध ॐ नम इति ॥१०८॥

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